राजा राम मोहन राय पुस्तकालय संगठन (RRRLF: Raja Rammohan Roy Library Foundation) के संगठन एवं उद्देश्यों का वर्णन करें।

राजा राम मोहन राय की स्मृति में उसके 200 जन्मदिन पर भारत सरकार ने मानवसंसाधन विकास मंत्रालय के संस्कृति विभाग के अधिन एक संस्था के रूप में 1972 में इसकी स्थापना हुई। राजाराममोहन राय का जन्म 22 मई सन् 1772 ई ० में हुआ जिन्होंने अपना समस्त जीवन प्रौढशिक्षा तथा समाज कल्याण में बिताया था।

इसका न्यास का केन्द्रीय कार्यालय साल्टलेक कलकत्ता में अवस्थित है। यह संस्थान मानव संसाधन विकास से जुड़े होने के कारण इसका अध्यक्ष मानव संसाधन विकासमंत्री या उसका प्रतिनिधि होता है, अध्यक्ष के द्वारा एक कार्य समीति का निर्माण किया जाता है।

जिसमें ख्याति प्राप्त पुस्तकालयअध्यक्ष, पुस्तकालय वैज्ञानिक, राष्ट्रीय पुस्तकन्यास तथा पुस्तकालय संकाय प्रतिनिधि सदस्य होता है इसके अलावा एक पूर्णकालीन निर्देशक, चार विशिष्ठ ग्रंथालय अध्यक्ष तथा मानव संसाधन विकास मंत्रालय के प्रतिनीधि भी इसके सदस्य होते है.

कार्यसमीति में कुल 22 सदस्य होते है प्रतिष्ठान के कार्यालय में एक निर्देशक, एक फील्ड पदाधिकारी, एक कार्यकारी पदाधिकारी, लेखा पदाधिकारी एवं अन्य कर्मचारी कार्यरत है।

इस न्यास का पंजीकरण वेस्ट बंगाल सोसाइटी रजिस्ट्रेशन एक्ट के अंतर्गत किया गया है। भारत सरकार के द्वारा सम्पूर्ण वित्तीय सहायता इसे प्राप्त है।)

Raja Rammohan Roy Library Foundation


राजा राम मोहन राय पुस्तकालय संगठन के उद्देश्य इस प्रकार से है:-

 

i. राज्य सरकारों के सहयोग से भारत के सार्वजनिक पुस्तकालयों के प्रगति की योजना बनाकर पुस्तक आंदोलन को बढ़ावा देना।

ii. ग्रामीण जनता तथा प्रौढ़ों में अध्ययन प्रवृति जागृत करना।

iii. एक राष्ट्रीय ग्रंथालय नीति तैयार करना तथा उस नीति को केन्द्रीय तथा राज्यसरकारों द्वारा अपनाने के लिए प्रयत्न करना।

iv. विभिन्न राज्यों में पुस्तकालय अधिनियम पारित करने तथा अपनाने के लिए राज्यसरकरों को प्रोत्साहित करना।

v. राज्य सरकारों द्वारा गठित (स्टेट लाइब्रेरी प्लानिंग कमेटी) के माध्यम से सार्वजनिक पुस्तकालय को अनुदान देना।

vi. राष्ट्रीय ग्रंथालय, राज्य केन्द्रीय ग्रंथालायों, जिला ग्रंथालयों को (Inter Library lone) द्वारा सम्बद्ध कर-कर एक राष्ट्रीय पुस्तकालय नेटवर्क या System स्थापित करना।

vii. सार्वजनिक पुस्तकालयों को तकनीकि सहायता प्रदान करना।

viii. सरकार को ग्रंथालय कार्यक्रम में परामर्श देना।

ix. देश को क्षेत्रीय ग्रंथालय सेवा केन्द्र की स्थापना करना।

x. ग्रंथालय एवं सूचना विज्ञान में अनुसंधान को गति देना।

 

राजा राम मोहन राय लाइब्रेरी संगठन गतिविधियाँ तथा कार्यक्रम

 

RRRLF अपने उद्देश्यों की प्राप्ति के लिए सतत् प्रयत्नशील है जो इनके कार्यक्रम एवं गतिविधियों से पता चलता है। इनकी गतिविधियाँ निम्नलिखित है:-

पुस्तकालयों की सहायता-सार्वजनिक पुस्तकालयों की सहायता के लिए इसने अनेक योजनाएँ चलायी है जिसे हम दो भागों में बाँट सकते हैं-

(A) Matching Assistance

(B) Full Assistance

(A) Matching Assistance:-समस्त सहायता या 50 प्रतिशत तक की सहायता वह सार्वजनिक पुस्तकालयों को निम्नप्रकार से प्रदान करती है।-

(i) नए ग्रंथालय खोलने तथा देहाती पुस्तक केन्द्र चलाने तथा मोबाईल लाइब्रेरी सेवा प्रदान करने के लिए यह (Matching Grant) प्रदान करती है।

(ii) पुस्तक एवं दृश्य (Audiovisual) सामग्री की सहायता।

(iii) पुस्तक संचयन तथा पुस्तक प्रदर्शन के लिए सहायता।

(iv) बालभवनों तथा नेहरू युवक केन्द्रों को ग्रंथालय चलाने के लिए अनुदान देती है।

(v) वर्कशॉप, सेमीनार तथा पुस्तक प्रदर्शनी के लिए सहायता।

(vi) जिलास्तर से निचले स्तर के सावजनिक पुस्तकालयों में भवन विस्तार के लिए सहायता

(vii) जिला तथा राज्य केन्द्रीय ग्रंथालयों में रेडियो टेलीविजन तथा वीडियो आदि खरीदने में अनुदान।

(B) Full Assistance:-

(i) केन्द्रीय क्रय के माध्यम से राज्य केन्द्रीय पुस्तकालय एवं जिला स्तर के पुस्तकालयों को पुस्तक की सहायता एवं जिलास्तर के पुस्तकालयों को पुस्तक की सहायता

(ii) केन्द्रीय अनुदान से चलनेवाले पुस्तकालयों को सहायता।

(iii) स्वेच्छनिक संस्थानों को सार्वजनिक पुस्तकालय चलाने के लिए सहायता।

(iv) बाल पुस्तकालयों को चलाने या सार्वजनिक पुस्तकालय में बाल विभाग खोलने के लिए सहायता।

(2) पुस्तक संघों को अनुदानः-पुस्तक संघों को सेमीनार तथा कांफ्रेंस आयोजित करने के लिए RRRLF समय-समय पर आर्थिक सहायता प्रदान करती है।

(3) पुस्कालय अधिनियम: – RRRLF का यह प्रयास लगातार जारी रहता है कि विभिन्न राज्य अपने क्षेत्र में पुस्तकालय अधिनियम लागू करे इन प्रयासों में RRRLF के अध्यक्ष राज्यों के शिक्षामंत्री तथा सम्बंधित विभागों से लगातार प्रत्राचार के माध्यम से सम्पर्क बनाए रखती है।

(4) राष्ट्रीय पुस्तकालय नीति -  डॉ ० बी ० पी ० वरूआ के अध्यक्षता में RRRLF ने 1981 में एक कार्यकारी दल का गठन राष्ट्रीय पुस्तकालय नीति का प्रारूप तैयार करने के लिए बनाया। फलस्वरूप 1983 ई ० में National Policy on Library and information system का प्रारूप तैयार किया गया जिसके आधार पर भारत सरकार के संस्कृति विभाग ने एक ड्राफ्ट पॉलिसी स्टेटमेन्ट जारी की तथा डॉ ० डी ० पी ० चद्धोपाध्याय की अध्यक्षता में एक समीति का कठन किया।

जिसने 1986 में अपनी अनुशंसाएँ प्रस्तुत की जिसपर विचार करने के लिए एक कमेटी का गठन मानव संसाधन विकास मंत्रालय द्वारा किया गया तथा इसकी अनुशंसाएँ सरकार के पास विचाराधीन है।

प्रकाशन - RRRLF के निम्नलिखित प्रकाशन है

(i) Books for the million at their doorstep.

(ii) Directories of Public libraries in India.

(iii) Indian Libraries: Trenis and perpectives.

(iv) Newsletter

इस प्रकार हम कह सकते है कि RRRLF पुस्तकालय आंदोलन को गतिशीलता देने तथा सार्वजनिक पुस्तकालयों को सहायता देने का कार्य करता आ रहा है यदि इसका प्रयास इस प्रकार चलता रहा तो उम्मीद है कि सभी राज्यों में पुस्तकालय प्रणाली अपनायी जायेगी तथा सभी राज्यों में पुस्तकालय अधिनियम लागू हो सकेगा साथ ही सार्वजनिक पुस्तकालय की व्यवस्था सुदृढ़ हो पाएगी।


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